Life of school
fist Day of school
स्कूल का पहला दिन।
एक जुलाई का दिन था, सभी बच्चों का नया एडमिशन कराया जाता हैं। सभी अपने अपने मम्मी और पापा के साथ स्कूल आते हैं। यह कहानी उन सभी बच्चों में से अंकुश की कहानी है। पहले दिन अंकुश बहुत उदास होता है क्यूंकि उसे स्कूल नहीं जाना था। उसे जबरदस्ती स्कूल भेजा जाता है। अंकुश रोता हुआ जिद करता हुआ स्कूल तो चला जाता है पर उसका स्कूल में मन नहीं लगता। धीरे धीरे अंकुश के दोस्त बनते हैं पढ़ाई के साथ खेल मस्ती करते थे। अब अंकुश को स्कूल जाना अच्छा लगता था। वह रोज अपने दोस्तो के साथ स्कूल जाता अच्छे से पढ़ाई करता और खुश रहता । पापा उसके लिए अच्छा बैग किताबो एवम और भी बहुत सारी चीजे लाया करते हैं। अंकुश अपने सभी दोस्तों के साथ पहली कक्षा पास कर लेता है और नई कक्षा में आ जाता हैं। इसी के साथ स्कूल का पहला पढाव पूरा हो जाता हैं। लेकिन अभी तो सिर्फ शुरुआत है। जैसे जैसे समय आगे बढ़ता जाता हैं हम भी आगे बढ़ते जाते हैं। आगे की कक्षा में आने पर हमे पढ़ाई का महत्व समझ आने लगता है। अंकुश रोज स्कूल जाता हैं। अच्छे से पढ़ाई करता हैं । घर जाकर होमवर्क करता हैं। लेकिन स्कूल जाना फिर भी अच्छा नहीं लगता। वो सोचता हैं की पता नही कब स्कूल से पीछा छुटेगा। ऐसा सोचते सोचते अंकुश अपनी प्राइमरी स्कूल पूरी कर लेता है। वह हाई प्राइमरी कक्षाओ में आता है। पढ़ाई के बोझ के साथ किताबों का बोझ भी बढ़ जाता है। वह पढ़ाई के बोझ में खोने लगता है। अंकुश स्कूल जाता हैं और होमवर्क फिर पढ़ाई करता है। अंकुश खेलना तो बंद ही कर देता है। मानो जैसे पढ़ाई के बोझ में उसका बचपन छीन गया हो। इन सब मे अंकुश को स्कूल जाना और पढ़ना अच्छा नही लगने लगता। अकुंश मानो जैसे पढ़ाई और स्कूल से पीछा छुड़ाना चाहता है। वह फिर भी सबकुछ सहे अपनी हाई प्राइमरी की पढाई पूरी करता है और अच्छे अंकों से पास हो कर नई कक्षा में आ जाता है। अकुंश अब बड़ी कक्षा में आ जाता हैं। उससे आगे की कक्षा मे पढ़ने वाले बच्चों का स्कूल में आखिरी साल होता है। अकुंश को लगने लगता है कि उसकी स्कूली जिंदगी एक साल में पूरी हो जाएगी। अंकुश स्कूल के महत्व को समझने लगता है। अब वो नहीं चाहता की वो स्कूल को छोड़कर जाए। अकुंश स्कूल में अच्छे से पढाई करने लगता है। साथ ही वह स्कूल के सारे मजे लेना चाहता है। उसे स्कूल जान बहुत अच्छा लगने लगता है। वह हर छुट्टी के बाद स्कूल जाने का इंतजार करता। अंकुश और उसके दोस्त रोजाना अच्छे से पढाई करते स्कूल के कामों में मदद करवाते। सभी प्रतियोगिता में भाग लेते। बहुत सारी मस्ती करते खेलते कूदते। नादानी में ही सही लेकिन सभी को परेशान कर देते। अकुंश और उसके दोस्त यह कक्षा भी अच्छे अंकों से पास कर लेते हैं।
Last Day of school
आपने स्कूल की पूरी जर्नी के बारे में पढ़ा। स्कूल का पहला और आखिरी दिन दोनो एक जैसे होते हैं। हम स्कूल के पहले दिन भी आंखो में पानी होता है और आखिरी दिन भी। स्कूल के आखिरी दिन चेहरे पे उदासी होती हैं की हम स्कूल को छोड़कर जा रहे हैं। पर एक खुशी भी होती है कि हम अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं। सभी अपनी अपने अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते जाते हैं। हमारे सभी दोस्त हमसे दूर होने लगते हैं। स्कूल वह जगह है जहां हमारा बचपन बीतता है। हम स्कूल को समझने में देर कर देते हैं। जब तक हमे स्कूल के महत्व की समझ आती है स्कूली ही पूरी हो जाती है ।
मुझे आशा है की आपको यह कहानी अच्छी लगी हो।
Thankyou।।
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