भारत की नारी। ( कविता )

 * बाते - बाते - बाते चारो तरफ सिर्फ बाते- ही - बाते ।

*  मां नी रोक लगाई पर उसे प्यार का नाम दिया ।

* पिता ने बंदिसी लगाई पर उसे संस्कारो का नाम दिया।

* मिलता सबूत गवाह फिर भी , कुछ ना कर पाते।। चारो तरफ सिर्फ बाते ही बाते

* ये जितने भी डिग्री वाले न्यूज़ है बनाते, दफ्तर में बैठे - बैठ।। खुद का समाचार है         बनाते ।। सब कुछ है मनोरंजन....

* कोई जल के मरी तो , कोई खुद ही जली ।। वो कल की पारी आज चुप है खड़ी ।

* पर खबर बदल गई घड़ी - घड़ी।।

* फिर हुए मोर्चे काम छोड़ के , जगा हिंदुस्तान बन गए हीरों।। डल गए स्टेट्स डल गई 

   फ़ोटो दो दिन में फिर हो गए ज़ीरो।।

* छोटे कपड़ नहीं छोटी तेरी सोच है।। तू उन में है , जो इस धरती पे बोझ है।।

* बात हम तब करेंगे जब तेरे घर भी बेटी होंगी।।

              * ये दर्द मुझे जचा नहीं**

* नजाने वो जानवर था या कोई और क्यूकी मर्द तो साला बचा नहीं।।

* औरत बोझ नहीं , बोझ बनाया है हमने ।

* सती से लेकर बल विवाह, दहेज़ भी बनाया है हमने। 

* हर औरत को दबी हुई आवाज बनाया है हमने ।।

                      ।। धन्यवाद।।

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